भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली
Abstract
यूँ तो विश्व के सभी देशों में शिक्षा को महत्त्व दिया जाता रहा है, किन्तु भारत में जो प्राचीन शिक्षा-पद्धति है, उसने न केवल देश-प्रदेश में, वरन् सम्पूर्ण विश्व में एक अमिट छाप छोड़ी है। अंग्रेज विद्वान् एफ.ई.केई इस बात की पुष्टि में कहते हैं कि “भारत के शिक्षाशास्त्रियों ने ऐसी शिक्षा-पद्धति का विकास किया जो न केवल साम्राज्यों के ध्वंस हो जाने तथा समाज में परिवर्तनों के बाद भी जीवित रही, वरन् हजारों वर्षों तक उच्च ज्ञान की ज्योति को भी जलाए रखा। उनमें ऐसे अधिसंख्य महान् चिन्तक हुए हैं जिन्होंने केवल भारत की ज्ञान-परम्परा पर ही नहीं, वरन् समूचे विश्व के बौद्धिक जीवन पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ा है।” इस शोध पत्र में भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली, छात्र-जीवन, गुरु का महत्त्व, गुरु-शिष्य सम्बन्ध, गुरुकुल और वहाँ की शिक्षा प्रणाली के बारे में जानेंगे।
Keywords:
भारत, प्राचीन, शिक्षा, गुरुकुल, चिन्तक, छात्र, अधिसंख्य।References
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