Manuscript Number : GISRRJ247510
पुराणों का दर्शन
Authors(1) :-डाॅ. अराधना उपाध्याय
ज्ञान सम्पन्न व्यक्ति को भी श्रीमद्भागवत नित्य मुक्त’ माना गया है। आत्मादर्शी व्यक्ति प्राकृति पुरूष विवेक से मुक्ति का सहज अधिकारी कहा गया है। द्वितीय स्कन्ध के दूसरे अध्याय में सद्योमुक्ति और क्रममुक्ति का आधार साधना वैषम्य को बताया गया है। अन्त में ‘‘ऋते ज्ञानान्न मुक्तिः’ का समथ्रन करते हुए स्पष्ट रूप में कहा गया है कि भक्ति की उत्पादिका निस्पृहता ही मुक्ति प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है।
डाॅ. अराधना उपाध्याय
पुराण, दर्शन, आत्मदर्शी, क्रममुक्ति, सद्योक्ति, भक्ति, उत्पादिका। Publication Details Published in : Volume 7 | Issue 5 | September-October 2024 Article Preview
पूर्व शोध छात्रा, संस्कृत विभाग, महन्थ रामाश्रयदास स्नाकोत्तर महाविद्यालय, भुड़कुड़ा, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश।
Date of Publication : 2024-10-05
License: This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
Page(s) : 60-65
Manuscript Number : GISRRJ247510
Publisher : Technoscience Academy
URL : https://gisrrj.com/GISRRJ247510