द्विवेदी युग का साहित्य : दलित चेतना और आंदोलन

Authors(1) :-डॉo कुणाल किशोर

द्विवेदी युग (1902-1920) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कालखंड है, जिसे भाषा, शैली और विषयवस्तु के स्तर पर नवजागरण का युग कहा जाता है। इस युग में महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादन में ‘सरस्वती’ पत्रिका ने साहित्यिक चेतना को दिशा दी। हालांकि, इस काल में दलित चेतना का स्वर अपेक्षाकृत मंद था, फिर भी कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं और रचनाएं दलित आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करती हैं। द्विवेदी युग में दलित चेतना का स्वर अपेक्षाकृत मंत्र था। इस युग के अधिकांश साहित्यकारों ने सामाजिक सुधार की बात तो की, लेकिन दलितों की समस्याओं को केंद्र में नहीं रखा। हालांकि इस काल में दलित लेखकों की कुछ संरचनाओं प्रकाशित हुई, जो आगे चलकर दलित साहित्य आंदोलन की नींव बनी।

Authors and Affiliations

डॉo कुणाल किशोर
पूर्व शोध छात्र, हिंदी विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया।

दलित, दलित साहित्य, दलित चेतना, द्विवेदी युग, आधुनिक हिंदी कविता, सरस्वती पत्रिका।

  1. महात्मा ज्योतिबा फुले रचनावली, भाग-1, भूमिका से
  2. अय्यप्पा पणिक्कर के विचार, कँवल भारती, दलित विमर्श की भूमिका से उद्धरत, पृष्ठ - 108
  3. वीर भारत तलवार, रस्साकशी पृष्ठ – 260
  4. सरस्वती सचित्र मासिक पत्रिका, भाग – 35, खंड – 1, जनवरी – जून
  5. डॉ एन सिंह, दलित साहित्य परंपरा और विन्यास, पृष्ठ 78
  6. कमलेश्वर, सारिका, मई 1975, पृष्ठ – 10
  7. हीरा डोम, अछूत की शिकायत, ‘सरस्वती’,सितंबर 1914, भाग 15, खंड 2, पृष्ठ संख्या 512-513
  8. रामविलास शर्मा, हिंदी जातीयता और समाज, पृष्ठ - 101

Publication Details

Published in : Volume 7 | Issue 6 | November-December 2024
Date of Publication : 2024-12-20
License:  This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
Page(s) : 108-113
Manuscript Number : GISRRJ247616
Publisher : Technoscience Academy

ISSN : 2582-0095

Cite This Article :

डॉo कुणाल किशोर, "द्विवेदी युग का साहित्य : दलित चेतना और आंदोलन", Gyanshauryam, International Scientific Refereed Research Journal (GISRRJ), ISSN : 2582-0095, Volume 7, Issue 6, pp.108-113, November-December.2024
URL : https://gisrrj.com/GISRRJ247616

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