Manuscript Number : GISRRJ247616
द्विवेदी युग का साहित्य : दलित चेतना और आंदोलन
Authors(1) :-डॉo कुणाल किशोर द्विवेदी युग (1902-1920) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कालखंड है, जिसे भाषा, शैली और विषयवस्तु के स्तर पर नवजागरण का युग कहा जाता है। इस युग में महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादन में ‘सरस्वती’ पत्रिका ने साहित्यिक चेतना को दिशा दी। हालांकि, इस काल में दलित चेतना का स्वर अपेक्षाकृत मंद था, फिर भी कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं और रचनाएं दलित आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करती हैं। द्विवेदी युग में दलित चेतना का स्वर अपेक्षाकृत मंत्र था। इस युग के अधिकांश साहित्यकारों ने सामाजिक सुधार की बात तो की, लेकिन दलितों की समस्याओं को केंद्र में नहीं रखा। हालांकि इस काल में दलित लेखकों की कुछ संरचनाओं प्रकाशित हुई, जो आगे चलकर दलित साहित्य आंदोलन की नींव बनी।
डॉo कुणाल किशोर दलित, दलित साहित्य, दलित चेतना, द्विवेदी युग, आधुनिक हिंदी कविता, सरस्वती पत्रिका।
Publication Details Published in : Volume 7 | Issue 6 | November-December 2024 Article Preview
पूर्व शोध छात्र, हिंदी विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया।
Date of Publication : 2024-12-20
License: This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
Page(s) : 108-113
Manuscript Number : GISRRJ247616
Publisher : Technoscience Academy
URL : https://gisrrj.com/GISRRJ247616