याज्ञवल्क्यस्मृति का नवीन भारतीय न्याय संहिता पर प्रभाव

Authors(1) :-सुकृति दीक्षित

वर्तमान में प्रचलित न्याय संहिता पर याज्ञवल्क्यस्मृति का अप्रतिम प्रभाव है। सम्पूर्ण न्याय संहिता स्मृतियों से ही प्रभावित है चाहे वह अपराध हो अथवा दण्ड स्मृतियों से कुछ भी अछूता नहीं है। अपनी धर्म की दिव्य अवधारणा के सहारे स्मृतियों ने ऐसी सामाजिक व्यवस्था का खाका हमारे मध्य प्रस्तुत किया जो अनेक आधुनिक समाजशास्त्रियों के द्वारा भी बहुत उपयोगी माना गया है। स्मृतियों में वर्णित आचार-संहिता द्वारा निर्देशित और संचालित हमारी सामाजिक संरचना इतनी सक्षम और सुदृढ़ होती चली गयी कि बाहरी दबाव भी उसे ध्वस्त करने में असमर्थ रहे। आज हम भारतीय बड़े ही गर्व से सामाजिक -सांस्कृतिक व्यवस्था के जिस सातत्व की चर्चा करते हैं और विश्व जिसे आश्चर्य से देखता है वह सब हमारी स्मृतियों का ही फल है। जिसके कारण आज हम न्याय विधान को सुचारू रूप से चलायमान देख पा रहे हैं ।

Authors and Affiliations

सुकृति दीक्षित
शोधच्छात्रा,संस्कृत विभाग, डी0जी0पी0जी0कॉलेज, सिविल लाइन्स कानपुर, उत्तर प्रदेश

याज्ञवल्क्यस्मृति, न्याय संहिता, सामाजिक, सांस्कृतिक, धर्मशास्त्र, महाप्रलय, धर्मसूत्र।

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Publication Details

Published in : Volume 8 | Issue 4 | July-August 2025
Date of Publication : 2025-07-10
License:  This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
Page(s) : 19-24
Manuscript Number : GISRRJ258345
Publisher : Technoscience Academy

ISSN : 2582-0095

Cite This Article :

सुकृति दीक्षित, "याज्ञवल्क्यस्मृति का नवीन भारतीय न्याय संहिता पर प्रभाव ", Gyanshauryam, International Scientific Refereed Research Journal (GISRRJ), ISSN : 2582-0095, Volume 8, Issue 4, pp.19-24, July-August.2025
URL : https://gisrrj.com/GISRRJ258345

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