परमतत्त्व की दार्शनिक मीमांसा

Authors(1) :-डाॅ0 ऋचा

दर्शन अन्तिम सत्य के उद्घाटन का प्रयास करता है पर इस अन्तिम सत्य के स्वरूप के सम्बन्ध में सभी दार्शनिक एक मत नहीं है। किसी दार्शनिक ने अद्वैतवाद की प्रतिष्ठा की है, किसी ने द्वैतवाद और किसी ने अनेकवाद की। द्वैतवाद गुण के आधार पर प्रकृति और पुरुष, जड़ और चेतन दो सत्तायें स्वीकार करता है। स्वरूप की दृष्टि से परमात्मा एक और जीवात्मा अनेक है। अनेकवाद सत्, चित् और आनन्द तीन सत्ताओं का प्रतिपादन करता है। सत् प्रकृति है जिसमें सत्, रज और तम की साम्यावस्था है। इस साम्यावस्था में वैषम्य अथवा विकृति परमात्मा के कारण उत्पन्न होती है, चित्-जीव है जो अनेक है, सच्चिदानन्द परमतत्त्व है। मत वैभिन्न होते हुए भी समस्त दार्शनिकों की प्रकृति एक ऐसी वास्तविकता की ओर गई जो आध्यात्मिक है जो किस भी अस्तित्व की ओर संकेत कर सकता है क्योंकि वह समस्त अस्तित्वों का मूलाधार है।

Authors and Affiliations

डाॅ0 ऋचा
असिस्टेन्ट प्रोफेसर-संस्कृत, काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपुर, भदोही।

परमतत्त्व, दार्शनिक, मीमांसा, प्रकृति, अद्वैतवाद, द्वैतवाद।

  1. ऋग्वेद- सायणाचार्य भाष्य, वैदिक संशोधन मण्डल, पूना, 1972
  2. श्रीमद्भगवद्गीता, गीता प्रेस, गोरखपुर
  3. वृहदारण्यकोपनिषद्- शाङ्करभाष्य, गीता प्रेस, गोरखपुर, संवत्, 2050
  4. ईशावास्योपनिषद्- शाङ्करभाष्य, गीता प्रेस, गोरखपुर, संवत्, 2050
  5. कठोपनिषद्- शाङ्करभाष्य, गीता प्रेस, गोरखपुर, संवत्, 2050
  6. तैत्तिरीयोपनिषद्- शाङ्करभाष्य, गीता प्रेस, गोरखपुर, संवत्, 2050
  7. वैदिक युग- सत्यकेतु विद्यालंकार, 7 संस्करण, जनवरी-2001
  8. वैदिक दर्शन- पद्मश्री डाॅ0 कपिलदेव द्विवेदी
  9. धर्मदर्शन का आलोचनात्मक इतिहास- डाॅ0 शिव भानु सिंह
  10. भक्ति का स्वरूप- डाॅ0 मुंशीराम शर्मा
  11. तर्कसंग्रह- अन्नंभट्ट, सम्पा0- शेषराज शर्मा रेग्मी, चैखम्भा प्रकाशन, वाराणसी, नवम् संस्करण, 1990
  12. तर्कभाषा- केशवमिश्र, तर्कभाषा दीपिका-आचार्य विश्वेश्वर सिद्धान्त शिरोमणि, चैखम्बा प्रकाशन, वाराणसी, संवत्, 2020
  13. वेदान्तसार- सदानन्द योगीन्द्र, तत्त्वपरिजात टीका डाॅ0 सन्तनारायण श्रीवास्तव, पीयूष प्रकाशन, इलाहाबाद, 1993,
  14. भारतीय दर्शन- आचार्य बलदेव उपाध्याय, चैखम्भा प्रकाशन, दिल्ली।
  15. पाश्चात्य दर्शन- डाॅ0 वी0एन0 सिंह

Publication Details

Published in : Volume 8 | Issue 3 | May-June 2025
Date of Publication : 2025-05-30
License:  This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
Page(s) : 447-452
Manuscript Number : GISRRJ258336
Publisher : Technoscience Academy

ISSN : 2582-0095

Cite This Article :

डाॅ0 ऋचा, "परमतत्त्व की दार्शनिक मीमांसा ", Gyanshauryam, International Scientific Refereed Research Journal (GISRRJ), ISSN : 2582-0095, Volume 8, Issue 3, pp.447-452, May-June.2025
URL : https://gisrrj.com/GISRRJ258336

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