वेदांत दर्शन में उल्लिखित ज्ञान मीमांसा का अध्ययन
Keywords:
दर्शनशास्त्र, वेदांत दर्शन, ज्ञान मीमांसा, ज्ञान के स्रोत।Abstract
वेदांत दर्शन, जिसका दार्शनिक आधार वेदों एवं विशेषतः उपनिषद में निहित है, तत्त्व, ज्ञान और मूल्य के त्रिआयामी विश्लेषण के माध्यम से मानव जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष की स्थापना करता है। वेदांत की तत्त्व मीमांसा ब्रह्म को परम सत्य तथा आत्मा को उसके अभिन्न स्वरूप के रूप में प्रतिपादित करती है; मूल्य मीमांसा सत्य, आत्मसंयम, करुणा और मोक्ष जैसे आध्यात्मिक आदर्शों को जीवन-दिशा प्रदान करती है; किन्तु इन दोनों की दार्शनिक वैधता एवं आधार ज्ञान मीमांसा में निहित है। वेदांत के अनुसार अविद्या बंधन का कारण है और विद्या मुक्ति का साधन, अतः ज्ञान की प्रकृति, स्रोत और प्रमाण का विश्लेषण अनिवार्य हो जाता है। प्रत्यक्ष, अनुमान और शब्द को प्रमाण मानते हुए भी वेदांत परम ज्ञान को आत्मानुभूति (अपरोक्षानुभूति) से संबद्ध करता है, जिससे स्पष्ट होता है कि यहाँ ज्ञान मात्र बौद्धिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अस्तित्वगत अनुभूति है। समकालीन ज्ञान-समाज के परिप्रेक्ष्य में, जहाँ सत्य, प्रमाण और वैधता के प्रश्न पुनः विचाराधीन हैं, वेदांत की ज्ञान मीमांसा आधुनिक ज्ञानमीमांसात्मक विमर्श से सार्थक संवाद स्थापित करने की क्षमता रखती है। इस प्रकार, प्रस्तुत शोध में ज्ञान मीमांसा का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि वही वेदांत के तत्त्व और मूल्य, दोनों आयामों की दार्शनिक आधारशिला है तथा मोक्ष-साधना के सैद्धांतिक एवं साधनात्मक पक्ष को सम्यक् रूप से स्पष्ट करती है।
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