स्मृतियों में जीवन दर्शन
Keywords:
स्मृति, जीवन, दर्शन, आचार, सूत्रकाल, समाविष्ट, समानभाव।Abstract
आचार ही उत्तम वर्ण है। महाभारत में यह मान्यता व्यक्त की गयी है कि ब्रह्म ने सभी मानवों को समानभाव से उत्पन्न किया था। परन्तु वे अपने अपने कर्मों के अनुरूप वर्णों में विभाजित हो गये। वर्णव्यवस्था के संबंध में विद्वानों का विचार है कि सूत्रकाल में वर्णव्यवस्था भेदपरक तत्वों से समाविष्ट हो गयी और इसमें कर्म की अपेक्षा जल को अधिक महत्व दिया जाने लगा।
References
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पुरि देहे शेते इति पुरुषः। पुरुषैरथ्र्यते प्राध्र्यते इति पुरुषार्थः।
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